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Tuesday, August 24, 2010

अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता...


1 comment:

Rajendra Swarnkar said...

भाई मंसूर नक़्वी जी
बहुत अच्छा कर रहे हो भाई !
अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता…
नेताओं की पग पग पर चांदी है , तब ही तो
हर कोई नेता बनने के लिए भागता हैं ।
आपको नज़्र है मेरी एक नज़्म के दो बंध …
मौज मनाए भ्रष्टाचारी !
न्याय व्यवस्था है गांधारी !
लोकतंत्र के नाम पॅ
तानाशाही सहने की लाचारी !

हत्यारे नेता बन बैठे !
नाकारे नेता बन बैठे !
मुफ़्त का खाने की आदत थी
वे सारे नेता बन बैठे !


उम्मीद है आप एक कार्टूनिस्ट के नज़रिये से भी
इन लाइनों पर ग़ौर फ़्रमाएंगे …
शुभकामनाओं सहित …
- राजेन्द्र स्वर्णकार